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ठाकुर,खेत,बैल और हल।

 कुँआ #ठाकुर का था पर कभी लोग राजतंत्र में प्यासे नहीं मरे, बाजरे का खेत ठाकुर का पर कोई भूखा नहीं मरता था , बैल ठाकुर के हल ठाकुर का हल की मूठ पर हाथ किसान का पर किसान आत्महत्या नही करते थे, उनकी हर ज़रूरत पूरी की ठाकुर ने उसके परिवार को पालने का एक मात्र साधन था ठाकुर के बैल और हल  गाँव ठाकुर के, शहर ठाकुर के, देश ठाकुर का, क्योकी मातृभूमि के लिए अपना और अपने बच्चों तक का खून देने वाला ठाकुर अपने देश और जनता के लिए ही जीता था,आक्रांताओ के आगे खडा होकर,बलिदान देकर! जिसकी वजह से लोग उनके उनकी आवाज़ को अपना लक्ष्य बना लेते थे l  जय राजपूताना🙏🚩

राजपूत समाज और खान पान।

 *राजपूत और मांसाहार*... """""""""""""""""""""""""""""""""" राजपूतों ने जब से मांसाहार और शराब को अपनाया तभी से मुगल से पराजित होना शुरू हुआ… राजपूतों का सिर धड से अलग होने के बाद कुल देवी युद्ध लडा करती थी… “एक षड्यंत्र और माँस और शराब की घातकता….” हिंदू धर्म ग्रंथ नहीँ कहते कि देवी को शराब चढ़ाई जाये.., ग्रंथ नहीँ कहते की शराब पीना ही क्षत्रिय धर्म है......... ये सिर्फ़ एक मुग़लों का षड्यंत्र था हिंदुओं को कमजोर करने का ! जानिये एक सच्ची ऐतिहासिक घटना… “एक षड्यंत्र और शराब की घातकता….” कैसे हिंदुओं की सुरक्षा प्राचीर को ध्वस्त किया मुग़लों ने ?? जानिये और फिर सुधार कीजिये !!              मुगल का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे ।             उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक दम्भोक्ति की “है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में ?”               सभा में सन्नाटा सा पसर गया ,एक बार ...